| का नाही भेटलीस तू मला ? |
| बस इतकच विचारलस? |
| असे तरी विचारायचे |
| या आधी का नाही भेटलीस ? |
| मी तर तुझीच वाट पाहत होते |
| तू यावे अन मला घेउन जावे |
| पण तुझे शब्द कधी एकलेच नाही |
| माझे कधी ओठावर आलेच नाही |
| मला माहित आहे .... |
| तू वाट पाहिलीस मी कधी विचारते |
| मी वाट पाहिली तू कधी सांगतोस ... |
| वेळ अशीच निघून गेली... |
| आयुष्याची संध्याकाळ... |
| . |
| . |
| . |
| . |
| कधीच जवळ आली... |
| ---------------------------शुभांगी...२६/०१/१० |
atishay sundar blog maintain kela aahe tumhi.
ReplyDeletemala khup avadla .
pretyak kavita ashaypurn aahe.
all the best for future.
keep it up.
Thanks Baaji..!!
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ReplyDelete:-)
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