| मीच होते येसुबाई , मीच होते ताराऊ, |
| होते मीच आनंदीबाई |
| आणी मीच होते लक्ष्मीबाई , |
| इतके सगळे करूनही ... |
| मी शेवटी अशीच राहिले .. |
| मीच उभारला राष्ट्र स्थापनेचा झेंडा .. |
| मलाच होती चीड .. |
| असत्याची ,पराधीनतेची,.. |
| हीच का ती मी ? |
| अजूनही मी अशीच आहे.. |
| स्त्री मुक्तीची आंदोलने करीत आहे .. |
| माझ्या मुक्तीसाठी .. |
| मीच अशी झटते आहे .. |
| गांजलेली ,रंजलेली , मी ... |
| कुणास ठाउक कशी.. |
| पण उभी आहे .. |
-- ____________________शुभांगी
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